बॉलीवुड में अपनी शानदार एक्टिंग से धाक जमाने वाली दीपिका पादुकोण ने सोमवार को अपनी आगामी फ़िल्म 'छपाक' का फर्स्ट लुक जारी कर दिया है.
दीपिका के ट्वीट के बाद से ही #Chhapaak ट्विटर में दूसरे नंबर पर ट्रेंड कर रहा है.
कई लोगों को दीपिका पादुकोण का ये अंदाज़ बेहद पसंद आ रहा है.
वहीं, कुछ लोग इस फ़िल्म को बनाने के लिए फ़िल्म की निर्देशिका मेघना गुलज़ार को बधाई दे रहे हैं.
एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की ज़िंदगी के ऊपर आधारित इस फ़िल्म को मशहूर फ़िल्म निर्देशिका मेघना गुलज़ार बना रही हैं.
दीपिका पादुकोण इस फ़िल्म में एक एसिड अटैक पीड़िता 'मालती' के किरदार में नज़र आएंगी.
इंस्टाग्राम से लेकर ट्विटर पर ये तस्वीर जारी होने सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
ट्विटर यूज़र रिद्धित लिखते हैं, "मुझे ये फर्स्ट लुक बेहद पसंद आया. ये बहुत ही असली नज़र आ रही हैं. दीपिका को लेकर मेरी नापसंदगी को अलग रखते हुए मैं कहना चाहता हूं कि मैं इस फ़िल्म का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूं. मेक-अप टीम को बहुत बहुत बधाई. शानदार काम."
एक अन्य ट्विटर यूज़र ने इस फ़िल्म के फ़र्स्ट लुक के बारे में बात करते हुए कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि ये फ़िल्म तेजाब से हमला करने वाले असामाजिक तत्वों को उनका घिनौना चेहरा दिखाने में कामयाब होगी.
ट्विटर पर कॉस्तुव सिन्हा ने लिखा है कि छपाक का फर्स्ट लुक बेहतरीन है, इतने बेहतरीन बदलाव के लिए दीपिका पादुकोण को बहुत बहुत बधाई.
लखनऊ वाला नाम से ट्विटर हैंडल चलाने वाले एक शख़्स ने ट्वीट किया है, "ये फ़िल्म दिल जीत लेगी. पर बिजनेस कितना करेगी कह नहीं सकते. लखनऊ और आगरा में ऐसी हक़ीक़त कहानियां बनकर घूम रही हैं.
वहीं, अगर इंस्टाग्राम की बात करें तो दीपिका पादुकोण की पोस्ट के जवाब में कई लोगों ने लिखा है कि ये तस्वीर दीपिका पादुकोण से भी ज़्यादा खूबसूरत है.
Tuesday, March 26, 2019
Wednesday, March 20, 2019
कश्मीर में पुलिस हिरासत में टीचर की मौत के बाद तनाव
पुलवामा ज़िले के अवंतिपुरा इलाके में पुलिस हिरासत में एक टीचर की मौत के बाद घाटी में एक बार फिर तनाव पैदा हो गया है.
मृत शिक्षक के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने रिज़वान पंडित को उनके घर से हिरासत में लिया था.
26 वर्षीय रिज़वान पंडित की मौत की ख़बर आने के बाद घाटी में कई जगह सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ है जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं.
पुलिस ने इस घटना पर एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि "मिलिटेंसी एक मामले की पड़ताल के क्रम में एक संदिग्ध व्यक्ति रिज़वान पंडित को अंवतिपुरा में हिरासत में लिया गया, इस व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है. इस मामले में नियमों के अनुरुप मजिस्ट्रेट से जांच कराई जा रही है."
रिज़वान के भाई ज़ुल्करनैन ने एक स्थानीय अख़बार को बताया है कि उनके भाई एक निजी स्कूल के प्रिसिंपल थे.
उन पर छह महीने पहले पब्लिक सेफ़्टी ऐक्ट (पीएसए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. ज़ुल्करनैन का कहना है कि अदालत उस मामले को खारिज कर दिया था.
उनके भाई ने अख़बार को यह भी बताया कि "मेरे भाई जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता थे लेकिन यह कोई गुनाह तो नहीं है."
ग़ौरतलब है कि पुलवामा में हुए हमले के बाद सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया है.
रिज़वान की मौत के बाद कई अलगाववादी संगठनों ने बुधवार को घाटी में बंद का आह्वान किया है. कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस घटना की निंदा की है और समयबद्ध तरीके से मामले की जांच कराने की मांग की है.
हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चेयरमैन मीर वाइज़ मौलवी उमर फ़ारुक़ ने ट्वीट करके इसे 'बर्बर हत्या' करार दिया है.
राज्य के मानवाधिकार आयोग ने मामले को उठाते हुए कहा है कि रिज़वान की मौत की पूरी रिपोर्ट पेश की जाए.
मृत शिक्षक के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने रिज़वान पंडित को उनके घर से हिरासत में लिया था.
26 वर्षीय रिज़वान पंडित की मौत की ख़बर आने के बाद घाटी में कई जगह सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ है जिसमें कई लोग घायल हो गए हैं.
पुलिस ने इस घटना पर एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि "मिलिटेंसी एक मामले की पड़ताल के क्रम में एक संदिग्ध व्यक्ति रिज़वान पंडित को अंवतिपुरा में हिरासत में लिया गया, इस व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है. इस मामले में नियमों के अनुरुप मजिस्ट्रेट से जांच कराई जा रही है."
रिज़वान के भाई ज़ुल्करनैन ने एक स्थानीय अख़बार को बताया है कि उनके भाई एक निजी स्कूल के प्रिसिंपल थे.
उन पर छह महीने पहले पब्लिक सेफ़्टी ऐक्ट (पीएसए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. ज़ुल्करनैन का कहना है कि अदालत उस मामले को खारिज कर दिया था.
उनके भाई ने अख़बार को यह भी बताया कि "मेरे भाई जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता थे लेकिन यह कोई गुनाह तो नहीं है."
ग़ौरतलब है कि पुलवामा में हुए हमले के बाद सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगा दिया है.
रिज़वान की मौत के बाद कई अलगाववादी संगठनों ने बुधवार को घाटी में बंद का आह्वान किया है. कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस घटना की निंदा की है और समयबद्ध तरीके से मामले की जांच कराने की मांग की है.
हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के चेयरमैन मीर वाइज़ मौलवी उमर फ़ारुक़ ने ट्वीट करके इसे 'बर्बर हत्या' करार दिया है.
राज्य के मानवाधिकार आयोग ने मामले को उठाते हुए कहा है कि रिज़वान की मौत की पूरी रिपोर्ट पेश की जाए.
Friday, March 8, 2019
UP की चुनावी जंग: जानिए कांग्रेस की टीम 11 में किसकी जमीन, कितनी मजबूत
उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की कवायद के बीच कांग्रेस ने गुरुवार को 11 उम्मीदवारों के नामों की लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अमेठी और रायबरेली से सोनिया गांधी के नामों के अलावा जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह जैसे कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं. कांग्रेस ने सूबे में ऐसे नामों का ऐलान किया है, जिन पर उसे जीत का ज्यादा भरोसा नजर आ रहा है. माना जा रहा है कि इनमें वो सीटें भी शामिल हैं, जिन्हें कांग्रेस अखिलेश-मायावती के सामने मांग रही है.
कांग्रेस के उम्मीदवार
कांग्रेस उम्मीवारों की जारी लिस्ट में रायबरेली से सोनिया गांधी, अमेठी से राहुल गांधी, फैजाबाद से निर्मल खत्री, कुशीनगर से आरपीएन सिंह, फरुर्खाबाद से सलमान खुर्शीद, सहारनपुर से इमरान मसूद, उन्नाव से अनु टंडन, धौरहरा से जितिन प्रसाद, बदायूं से सलीम शेरवानी, अकबरपुर से राजाराम पाल और जालौन से ब्रजलाल खबरी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.
चुनावी समीकरण
कांग्रेस ने जिन 11 नामों की घोषणा की है. मौजूदा समय में इनमें से दो सीटें कांग्रेस के पास है. जबकि कुशीनगर और सहारनपुर सीट ऐसी हैं जहां पर पार्टी दूसरे नंबर पर और बाकी बची 7 सीटों पर कांग्रेस तीसरे और चौथे नंबर रही थी. हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बदायूं, जालौन और सहारनपुर सीट छोड़कर बाकी सीटों पर जीत दर्ज की थी.
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा-बसपा गठबंधन के सामने रायबरेली और अमेठी के अलावा जिन 13 सीटों की डिमांड रखी थी. माना जाता है कि उनमें से कुशीनगर, धौरहरा, सहारनपुर, उन्नाव, अकबरपुर और फरुर्खाबाद सीट शामिल थीं. इनमें से छह सीटों में से तीन सीटें बसपा के खाते में हैं और तीन ही सीट सपा के खाते में हैं.
कांग्रेस का फोकस
दरअसल प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद कांग्रेस इस बार के लोकसभा चुनाव में सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से करीब दो दर्जन सीटों पर खास फोकस कर रही है. इनमें से गुरुवार को कांग्रेस द्वारा जारी लिस्ट में से 9 सीटें शामिल हैं. यहां कांग्रेस पूरी प्लानिंग के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है.
राजनीतिक विश्वलेषणों की मानें तो रायबरेली और अमेठी के अलावा कांग्रेस जहां सबसे मजबूत मानी जा रही है. उनमें कुशीनगर, धौरहरा, उन्नाव और सहारनपुर सीट प्रमुख है. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन के बाद कांग्रेस का सियासी समीकरण कई सीटों पर गड़बड़ा भी रहा है.
बसपा बनी चुनौती
बसपा ने पहले ही सहारनपुर सीट से हाजी फजलुर्रहमान को उतारकर कांग्रेस के इमरान मसूद का सियासी समीकरण को बिगाड़ दिया है. फजलुर्रहमान सहारनपुर के मेयर के चुनाव में महज 9 सौ मतों से बीजेपी उम्मीदवार से हार गए थे. बसपा उम्मीदवार की इस हार के लिए सहारनपुर के लोग इमरान मसूद को जिम्मेदार मानते हैं. यही वजह है कि इमरान मसूद जगह-जगह अपनी जनसभाओं में सफाई दे रहे हैं.
सहारनपुर के ही रहने वाले गुलजार अहमद कहते हैं कि इमरान मसूद के चलते ही सहारनपुर सीट से ही मुस्लिम उम्मीदवार की हार हुई है. इसके अलावा अब हम लोग नहीं चाहते हैं कि हमारा सांसद हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत पैदा करने वाला हो. सपा-बसपा गठबंधन के बाद सहारनपुर का बड़ा तबका बसपा के साथ खड़ा है.
आरपीएन और जितिन से उम्मीदें
पिछले चुनाव में कुशीनगर लोकसभा सीट पर दूसरे नंबर पर रहे आरपीएन सिंह पर पार्टी ने फिर दांव लगाया है. प्रियंका गांधी को पूर्वांचल की कमान सौंपे जाने के बाद माना जा रहा है कि आरपीएन बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे. जबकि धौरहरा सीट से कांग्रेस ने जितिन प्रसाद पर एक बार फिर भरोसा जताया है. माना जा रहा है कि जितिन पिछले चुनाव में भले ही मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा सके थे, लेकिन इस बार वो काफी कड़ी टक्कर दे सकते हैं. हालांकि कांग्रेस की मजबूत सीटों में उन्नाव सीट भी मानी जा रही है, जहां से पार्टी ने अन्नू टंडन को उतारा है. वो 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुकी हैं.
कांग्रेस के उम्मीदवार
कांग्रेस उम्मीवारों की जारी लिस्ट में रायबरेली से सोनिया गांधी, अमेठी से राहुल गांधी, फैजाबाद से निर्मल खत्री, कुशीनगर से आरपीएन सिंह, फरुर्खाबाद से सलमान खुर्शीद, सहारनपुर से इमरान मसूद, उन्नाव से अनु टंडन, धौरहरा से जितिन प्रसाद, बदायूं से सलीम शेरवानी, अकबरपुर से राजाराम पाल और जालौन से ब्रजलाल खबरी लोकसभा चुनाव लड़ेंगे.
चुनावी समीकरण
कांग्रेस ने जिन 11 नामों की घोषणा की है. मौजूदा समय में इनमें से दो सीटें कांग्रेस के पास है. जबकि कुशीनगर और सहारनपुर सीट ऐसी हैं जहां पर पार्टी दूसरे नंबर पर और बाकी बची 7 सीटों पर कांग्रेस तीसरे और चौथे नंबर रही थी. हालांकि 2009 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने बदायूं, जालौन और सहारनपुर सीट छोड़कर बाकी सीटों पर जीत दर्ज की थी.
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सपा-बसपा गठबंधन के सामने रायबरेली और अमेठी के अलावा जिन 13 सीटों की डिमांड रखी थी. माना जाता है कि उनमें से कुशीनगर, धौरहरा, सहारनपुर, उन्नाव, अकबरपुर और फरुर्खाबाद सीट शामिल थीं. इनमें से छह सीटों में से तीन सीटें बसपा के खाते में हैं और तीन ही सीट सपा के खाते में हैं.
कांग्रेस का फोकस
दरअसल प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद कांग्रेस इस बार के लोकसभा चुनाव में सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से करीब दो दर्जन सीटों पर खास फोकस कर रही है. इनमें से गुरुवार को कांग्रेस द्वारा जारी लिस्ट में से 9 सीटें शामिल हैं. यहां कांग्रेस पूरी प्लानिंग के साथ चुनावी मैदान में उतर रही है.
राजनीतिक विश्वलेषणों की मानें तो रायबरेली और अमेठी के अलावा कांग्रेस जहां सबसे मजबूत मानी जा रही है. उनमें कुशीनगर, धौरहरा, उन्नाव और सहारनपुर सीट प्रमुख है. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन के बाद कांग्रेस का सियासी समीकरण कई सीटों पर गड़बड़ा भी रहा है.
बसपा बनी चुनौती
बसपा ने पहले ही सहारनपुर सीट से हाजी फजलुर्रहमान को उतारकर कांग्रेस के इमरान मसूद का सियासी समीकरण को बिगाड़ दिया है. फजलुर्रहमान सहारनपुर के मेयर के चुनाव में महज 9 सौ मतों से बीजेपी उम्मीदवार से हार गए थे. बसपा उम्मीदवार की इस हार के लिए सहारनपुर के लोग इमरान मसूद को जिम्मेदार मानते हैं. यही वजह है कि इमरान मसूद जगह-जगह अपनी जनसभाओं में सफाई दे रहे हैं.
सहारनपुर के ही रहने वाले गुलजार अहमद कहते हैं कि इमरान मसूद के चलते ही सहारनपुर सीट से ही मुस्लिम उम्मीदवार की हार हुई है. इसके अलावा अब हम लोग नहीं चाहते हैं कि हमारा सांसद हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत पैदा करने वाला हो. सपा-बसपा गठबंधन के बाद सहारनपुर का बड़ा तबका बसपा के साथ खड़ा है.
आरपीएन और जितिन से उम्मीदें
पिछले चुनाव में कुशीनगर लोकसभा सीट पर दूसरे नंबर पर रहे आरपीएन सिंह पर पार्टी ने फिर दांव लगाया है. प्रियंका गांधी को पूर्वांचल की कमान सौंपे जाने के बाद माना जा रहा है कि आरपीएन बीजेपी को कड़ी टक्कर देंगे. जबकि धौरहरा सीट से कांग्रेस ने जितिन प्रसाद पर एक बार फिर भरोसा जताया है. माना जा रहा है कि जितिन पिछले चुनाव में भले ही मोदी लहर में अपनी सीट नहीं बचा सके थे, लेकिन इस बार वो काफी कड़ी टक्कर दे सकते हैं. हालांकि कांग्रेस की मजबूत सीटों में उन्नाव सीट भी मानी जा रही है, जहां से पार्टी ने अन्नू टंडन को उतारा है. वो 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर चुकी हैं.
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